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त्रिआयामी हृदयोपचार कार्यक्रम के प्रणेता और ग्लोबल हास्पीटल माउण्ट आबू के हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश गुप्ता ने कहा

रायपुर : त्रिआयामी हृदयोपचार कार्यक्रम के प्रणेता और ग्लोबल हास्पीटल माउण्ट आबू के हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश गुप्ता ने कहा कि हृदयरोग की बीमारी का अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में दुनिया के कुल हृदयरोगियों में साठ प्रतिशत संख्या भारतीयों की होगी। हृदयरोग से बचने के लिए जीवनशैली को बदलना जरूरी है। डॉ. गुप्ता ब्रह्माकुमारीज रायपुर के शान्ति सरोवर में आयोजित दो दिवसीय त्रि-आयामी स्वास्थ्य समारोह में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।उन्होंने बाईपास सर्जरी को सिर्फ टाईम पास बतलाते हुए कहा कि हृदयरोग का प्रमुख कारण है तनावचिन्तागुस्सा और उदासी। इसे जीवन शैली दवा और योग से ठीक किया जा सकता है. अब सोलमाइण्डबाडी और मेडिसीन  के सिद्घान्त को भारत सरकार ने भी स्वीकार किया है। उन्होंने इसे नेशनल प्रोग्राम ऑफ लाईफस्टाइल्स घोषित किया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के डायरेक्टर डॉ. नितिन मोहन नागरकर ने कहा कि विदेशों में हुई रिसर्च से यह सिद्घ हुआ है कि दवाई के बिना भी रोगों का उपचार किया जा सकता है। क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।