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आज का सुविचार

हमारे पूर्व के कार्मिक अकाउंट के कारण भी हमारी वर्तमान स्थिति प्रभावित होती है।

हमारे पूर्व  के कार्मिक अकाउंट के कारण भी हमारी वर्तमान स्थिति प्रभावित होती है।पास्ट में जाने अनजाने में हमारे द्वारा किसी आत्मा का अहित हुआ हो या  उसे दुःख पहुंचा हो इससे भी हमारी वर्तमान अवस्था प्रभावित होती है। ऐसी  आत्माओं को भी सूक्ष्म में योग द्वारा प्रेम, सुख,शांति का सकाश देनी है। ऐसा करना आत्म कल्याण के साथ ही दूसरों का कल्याण एवम प्रकृति का कल्याण है.( अज्ञात )

 

परहित जो सदा करें, जनसेवक कहलायें

परहित जो सदा करें, जनसेवक कहलायें. आत्म संतुष्टि सदा मिले जग में नाम कमाए. मायूस चेहरों पर मुस्कान लाकर जो बनाता खुशियों का समन्दर. सफलता उनके कदम चूमती औ कहलाता वही  सबका सिकंदर. मिलती सबकी दुआएं उनको परमात्मा का प्रेम भी पहुँचता उनको.

हमारा मकसद नर से नारायण, नारी से लक्ष्मी

हमारा मकसद नर से नारायण, नारी से लक्ष्मी, व मनुष्य से देवता बनना तथा स्वर्ग की बादशाही पाना है. इसलिए अभी जीते जी सब संबंधो से मोह तोडना है, इस पुराणी दुनिया में रहते हुए भी नहीं रहना है. गृहस्थ में रहते हुए बुद्धि से सब कुछ पुराणी चीजों से सन्यास कर अपने को आत्मा निश्चय करना है.

तुम्हारी आत्मा जानती है कि यह पुराना घर छोड़ना है

तुम्हारी आत्मा जानती है कि यह पुराना घर छोड़ना है. आत्मा यह भी समझती है कि कैसे आत्मा को नया घर मिलता है. पवित्र आत्मा को शरीर भी पवित्र ,गुण संपन्न मिलता है. तो, पावन बनेगे तो पावन घर जरूर मिलेगा. इसके लिए ही परमात्म याद का पुरुषार्थ करना चाहिए.

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एक्जाम टाइम में पढ़ाई में मन नहीं लग रहा तो ये करें

  आपका जीवन स्तर कैसा रहेगा? इस प्रश्न का उत्तर आपकी पढ़ाई, आपकी एज्युकेशन कैसी है, पर निर्भर करता है। जो व्यक्ति विद्यार्थी जीवन में अच्छे अंक अर्जित करता है, नि:संदेह उसका जीवन स्तर काफी अच्छा रहता है।अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए जरूरी है पढ़ाई में मन लगाना। जिन विद्यार्थियों का मन पढ़ाई में रहता है, वे हर परीक्षा में श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त करते हैं। ठीक इसके विपरित जिस छात्र या छात्रा का मन इधर-उधर भटकता है, कुछ याद नहीं रहता, उसे परीक्षाओं में निराशा ही हाथ लगती है। यदि मन को एकाग्र और शांत कर लिया तब इस निराशा से बचा जा सकता है।

अष्टांग योग के अंग ध्यान से मन को एकाग्र और शांत किया जा सकता है। नियामित रूप से कुछ समय ध्यान करने से काफी अच्छे अनुभव प्राप्त होते हैं, दिन अच्छा बितता है और मन प्रसन्न रहता है। किसी भी शांत एवं स्वच्छ स्थान पर सुविधाजनक आसन में बैठ जाएं और प्राणायाम शुरू करें। मन को शांत करके ध्यान लगाएं। ध्यान लगाते वक्त हनुमान चालिसा का जप आपको और भी अधिक चमत्कारिक परिणाम प्रदान करेगा। विद्यार्थियों को अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए ध्यान के साथ हनुमान चालिसा की पंक्ति- विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। इस पंक्ति का जप करना चाहिए।

इस पंक्ति का अर्थ यह है कि रामदूत श्री हनुमान विद्यावान अर्थात् ज्ञान के भंडार हैं, गुणवान हैं और काफी चतुर भी। वे हर समय राम की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। हनुमानजी अपने भक्तों को भी श्रेष्ठ ज्ञान और गुण प्रदान करते हैं। इस भक्ति के प्रभाव से विद्यार्थी का मन पढ़ाई में लगेगा और कई अन्य स्वास्थ्य लाभ के साथ ही धर्म लाभ भी प्राप्त होगा।