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हमारा मकसद नर से नारायण, नारी से लक्ष्मी

हमारा मकसद नर से नारायण, नारी से लक्ष्मी, व मनुष्य से देवता बनना तथा स्वर्ग की बादशाही पाना है. इसलिए अभी जीते जी सब संबंधो से मोह तोडना है, इस पुराणी दुनिया में रहते हुए भी नहीं रहना है. गृहस्थ में रहते हुए बुद्धि से सब कुछ पुराणी चीजों से सन्यास कर अपने को आत्मा निश्चय करना है.