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सफलता का आधार मानसिक स्वच्छता - पुष्पेन्द्र कुमार साहू

दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति विचार हैं। अपने विचारों के कारण ही एक व्यक्ति महात्मा और पापात्मा कहलाता है। स्वामी विवेकानंद से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने विचारों के बल पर ही इतने बड़े परिवर्तन के आधार पुरुष बने। यह हम पर निर्भर करता है हम क्या बनना चाहते हैं? हमारे मन में जो भी विचार आते हैं उसे ये प्रकृति ग्रहण करती है। यदि हमारे सकारात्मक विचार हैं तो प्रकृति  सकारात्मक विचार ग्रहण करेगी और उसका रिजल्ट भी सकारात्मक आएगा। वैसा ही हमारे आसपास का माहौल नजर आएगा, वहीं यदि हमारे विचारों में नकारात्मकता, द्वेष, ईष्र्या, नफरत, लालच और अहंकार है तो उसे भी प्रकृति के पांचों तत्व उसी रूप में ग्रहण करेंगे। नतीजा हमारे आसपास का माहौल भी वैसा ही बन जाएगा। इसलिए जैसे हम अपने कर्मों का ध्यान रखते हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं, वैसे ही हमें यह जानना भी जरूरी है कि हमें क्या सोचना चाहिए और क्या नहीं? इस पर कभी हम ध्यान ही नहीं देते हैं। आज से अपनी सोच पर अटेंशन दें। मन को समझाएं कि अमुख विचार हमारे लिए काम का नहीं है। उसे सोचने में हम अपना समय क्यों खराब करें। 
 
 
बचपन में हमें सिखाया जाता है कि बेटा ये काम हमें करना है ये नहीं, जैसे.... आग में हाथ नहीं डालते। गर्म दूध नहीं पीते, वैसे ही ये कभी नहीं बताया जाता कि बेटा ऐसा सोचना चाहिए। अपने मन में ऐसे विचार करना चाहिए। मन की रोजाना सफाई इस तरह से करें। मन को शक्तिशाली ऐसे बनाएं। अपना आंतरिक विकास इस तरह करें....ये बातों ज्यादातर भारतीय घरों में नहीं बताईं जाती हैं। क्योंकि ज्यादातर माता-पिता को ही ये सब पता नहीं होता है। 
आज से प्रतिज्ञा करें.... मैं अपनी लाइफ में वही विचार करुंगा, वही सोचूंगा जो मुझे तरक्की की ओर ले जाएं, जिससे  मेरा आंतरिक विकास और सशक्तिकरण हो, मेरी उन्नति हो, मेरा व्यक्तित्व महान बने, मेरा सपना पूरा हो, परमात्मा पिता को कैसे खुश रख सकूं, परमात्मा की मुझसे क्या आशाएं हैं, मैं एक शुद्ध, शक्तिशाली, महान, आत्मा हूं। मेरा जन्म महान कार्यों के लिए हुआ है। सफलता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है। परमात्मा पिता मेरे साथी और शिक्षक हैं। मेरा हाथ ईश्वर के हाथ में है। मैं बहुत भाग्यशाली और खुशनसीब आत्मा हूं...... जैसे  ही ये विचार आप करने लगेंगे तो चंद दिनों में ही आप अपने जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन देखेंगे,  क्योंकि प्रकृति का नियम है वह जो जैसा लेती है उसी रूप में हमें वापस भी करती है। 
 
आपका मन डस्टबिन नहीं है
ग्लोबलाइजेशन के दौर में आज सूचनाओं का भंडार है। वॉट्सएप और फेसबुक ने तो सबसे ज्यादा सूचना क्रांति ला दी है। आज हम सुबह से उठते ही न्यूज पेपर पढ़ते हैं जिसमें नकारात्मक सूचनाओं का भंडार होता है। इसके अलावा टीवी शो, मूवीस, दिन में दोस्तों के साथ गपशप, वॉट्सएप, फेसबुक और एक-दूसरे की आलोचना करने में ही दिन निकाल देते हैं और रात को सो जाते हैं। दिनभर जो हमने नेगेटिव बातें अपने मन में भरीं हैं वह हमारे मस्तिष्क में सेव हो जाती हैं। क्योंकि हमारा मस्तिष्क हमारा सीपीयू है। इसकी मेमोरी अनलिमिटेड है। फिर वहीं सुबह फिर से नेगेटिव न्यूज और दिनभर वहीं दिनचर्या। लेकिन हम कभी सोचते ही नहीं है कि हम जो मन में डस्टबिन की तरह डालते  जा रहे हैं उसकी भी सफाई करनी चाहिए। नतीजन मन में नकारात्मका चीजें इक्क_ी होने से मन  अशांत होने लगता है, तनाव बढ़ता है, डिप्रेशन बढ़ता है, गुस्सा आने लगता है, चिड़चिड़े हो जाते हैं कभी बार तो नींद नहीं आती है। 
आज से संकल्प लें कि हम अपने मन को डस्टबिन नहीं बनाएंगे। जो सूचना  या जानकारी हमारे काम की है उसे ही रिसीव करेंगे और रात को सोते समय  उसे डिलीट कर देंगे अर्थात् सारा दिन का हिसाब-किताब परमात्मा को देकर ही सोने जाएंगे। साथ  ही रोज मेडिटेशन करेंगे, क्योंकि मेडिटेशन में ही वह सकती है जो हमारे विचारों को कंट्रोल में रखना सिखाता है। यह अंतर्जगत की वह यात्रा है जिसमें हम आत्म मंथन और आत्म चिंतन से स्यवं की कमी-कमजोरियों  को पहचान सकते हैं, उन्हें दूर कर सकते हैं। इससे मन शक्तिशाली होता है और उसकी कार्यक्षमता भी बढ़ती है।
 
पुष्पेन्द्र कुमार साहू, पत्रकार