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जीवन में गुणों का महत्व

आज के समाज की ओर हम ग़ौर करे तो अधिकतम नकारात्मक पहलु दिखाई देते हैं. वे चाहे दुखद घटनाएँ,तकलीफ़ेबीमारियाँडिप्रेशन जैसे मानसिक रोग हों या फिर संबंधों में दरार आदि. उसका सबसे बड़ा कारण है जीवन में गुणों का अभाव। आज की शिक्षा प्रणालीुकेशन सिस्टएप्रणाली  शिक्षा  वर्तमान  ग़ौर करें तो आजनयीकनीकियों और विज्ञान की शिक्षाओं पर बहुत ज़ोर दिया जा रहा है। ये जानना बहुत ज़रूरी है कि जहाँ ये शिक्षा अति आवश्यक है वहीं गुणों की शिक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। देखने में आता है कि कहीं पर भी गुणों के महत्व पर ज़ोर नही दिया जा रहा है। क्यूँ हम समझते हैं कि नयी तकनीक ज़रूरी हैं इसका जवाब ज़रूर हमारे पास है और ये सही भी है कि इसके महत्व को कम नही आँका जा सकता लेकिन क्या जीवन जीते हुए जीवन के मूल्यों को कम आँका जा सकता है। नाम ही है जीवन मूल्य (गुणअर्थात् वो चीज़ जो हमारे जीवन के मूल्य यानी जीवन की क़ीमत को बढ़ायें। हर क़दम में जहाँ नयी-नयी तकनीक से जुड़ी जानकारी काम आती है वहीं हर क़दम में सहनशीलतासन्तुष्टताप्रेमआत्मसंयम,हिम्मत आदि के महत्व को कौन नकार सकता है।

आज का युवा गुणों के महत्व से अनजान राह भटक गया है। मन को सही दिशा ना मिलने के कारण भटका हुआ मन ग़लत-ग़लत काम कर रहा है और स्वयं कोपरिवार को और समाज को बहुत कष्ट पहुँचा रहा है। ऐसी अनेकानेक ख़बरों से रोज़ अख़बार भरा रहता है। यदि हमें उनके जीवन की परवाह है तो उन्हें हमें सही दिशा दिखानी ही होगी क्यूँकि वो युवा हमारे अपने ही बच्चे अपने ही मित्र सम्बंधी हैं। हम सभी जानते हैं कि युवाओं से सबकी अपेक्षाएँ चाहे मात-पिताचाहे समाजचाहे देश की बनी ही रहती हैं क्यूँकि युवा ही आने वाले समाज की नींव भी है। ऐसे में युवा को सही शिक्षा देना और ही महत्वपूर्ण हो जाता है। जैसा आज का युवा होगा वैसा हमारा आने वाला समाज होगा इतनी ज़िम्मेवारी सभी युवाओं पर है।

इस बात को जानते हुए हमें युवाओं को हर उस बात से जागरूक करवाना होगा जो हम आने वाले समाज में देखना चाहते हैं। अगर हमारी श्रेष्ठ कामना है कि आने वाला समाज व्यसनमुक्त बनेभिन्न-भिन्न घात चाहे रेप चाहे रैगिंग चाहे आत्महत्या जैसी बुराइयों से मुक्त बने तो निश्चित ही उन सबसे जुड़ी शिक्षायों से हमें उन्हें परिचित करवाना होगा तभी उनपर कंट्रोल (नियंत्रणपाना सम्भव है।

जीवन में हिम्मतदृढताआत्मविश्वासपवित्रतासच्चाईआत्मसंयमसहलशीलतासरलताख़ुशी,आत्मसम्मान आदि वो श्रेष्ठतम गुणों में से कुछ हैं जिनके बारे में जानने और उनको जीवन में आत्मसात करने का तरीक़ा (अपनाने का तरीक़ाजानने की शिक्षा से युवा अपने जीवन में बहुत उन्नती प्राप्त कर सकता हैना सिर्फ़ अपने जीवन में बल्कि ऐसा युवा ही दुनिया के लिए भी एक आदर्श बन सकता है।

वास्तव में समाज को व देश को ऐसे युवा की तलाश ही रहती है जो मूल्यवान के साथ-साथ अच्छी भौतिक शिक्षा भी प्राप्त किए हुए हो। ये दोनो ही अपने-अपने स्थान पर महत्वपूर्ण हैं। जहाँ भौतिक शिक्षा शरीर के पालन-ोषण के लिए ज़रूरी है वहीं गुणों की शिक्षा ख़ुशी और आत्मविश्वास को क़ायम रखने के लिए acheter du cialis en ligne परमआवश्यक है। अगर मूल्याँकन (इवैल्यूएशनकिया जाए तो दोनो का महत्व बिलकुल बराबर है।

अगर हम सिर्फ़ भौतिक शिक्षा को ही सारा महत्व देते हैं तो इसका प्रैक्टिकल रिज़ल्ट यही होता कि देश के सबसे माननीय इन्स्टिटूशन (संस्थानमें जाने के बाद भी बच्चे छोटी-छोटी बातों पर आत्महत्या जैसी घटनाओं के शिकार हो जाते हैं।

वहीं अगर हमने उन्हें हिम्मतआत्मविश्वासधीरजसदभावना जैसे गुणों की शिक्षा दी होती तो वो बात-बात में लड़ाई-झगड़ाबदले की भावनादुर्व्यवहार से घिरा नहीं रहता। लेकिन आज देखने में तो ये आता है,बहुत करके सुनने को भी मिल ही जाता है कि ये तो उलटा सुना नहीं सकता दूध का धुला है आदि आदि। आज का समाज गुणों से इतना अनजान प्रतीत होता है कि सहनशीलता और सच्चाई जैसे महान गुणों को आज कमज़ोरी माना जाता है और यही सुनने में आता है कि चुप रहने से और सच्चाई से काम नहीं चलता। क्या हम इतिहास के उन गौरवशाली हस्तियों से अपरिचित हैं जिनकी महानता का गायन हम उनके इन महान गुणों के आधार पर ही करते हैं। चाहे वो मदर टेरेसा होंमहात्मा गांधी होंगौतम बुद्धजीसस क्राइस्ट या स्वामी विवेकानंद हों। इन सभी को कभी ना कभी ग्लानि के शब्दों को सहन करना पड़ा लेकिन इन्होंने चुप्पी साधी और उस ग्लानि की परवाह किए बिना अपने लक्ष्य की और अपने सत्यता के बल से बढ़ते ही गएइसलिए आज हम उनके प्रशंसक हैं।

आख़िर कैसे सच्चाई और सहनशीलता को हम कमज़ोरी नाम दे सकते हैं। इन ग़लत मान्यताओं के कारण आज हमारा जीवन कहाँ से कहाँ पहुँच गया। हमारा देश जिसकी संस्कृति (कल्चरही देश को गौरान्वित करता था उसे ही हमने कमज़ोरी का नाम दे दिया।

वास्तव में इंसान की महिमा सिर्फ़ उसके गुणों से ही होती है। बिना गुणों के तो इंसान को इंसान का दर्जा दिया ही नहीं जा सकता। अगर हम आज के कामयाब लोगों में भी देखें तो सचिन तेन्दुलकर हो या अमिताभ बच्चनउनके बोलने से ही उनके गुण प्रत्यक्ष होते हैं। तभी हम उनकी महिमा करते हैं।

यहाँ तक कि मंदिरों में भी जिनकी हम पूजा,अर्चनावंदना कर रहे हैंउसका एकमात्र आधार उनके गुण ही तो हैं। इसलिए हम देवी-देवतायों के आगे यही गाते हैं कि आप सर्वगुण सम्पन्न हैं हमपर तरस करिए। वो इतने ऊँचे इसलिए ही हैं क्यूँकि उनमें वो गुण हैं जो हममें नहीं हैं।

यहाँ मैं अपना एक अनुभव सुनाना चाहूँगी कि युवायों की ऐसी चर्चायों में क्या प्रतिक्रिया होती है। मैं इस एप्रिल माउंट आबू थी जहाँ मुझे ओम् शांति भवन में परमात्म ज्ञान सुनाने का सुअवसर मिला। मुझे अक्सर युवाओं को भाषण करने के समय कहा जाता था कि ये रुकेंगे सुनेंगे नहीं क्यूँकि इनका लक्ष्य साइटसीइंग है। लेकिन मैं उन्हें सुनाने से पहले यही कहती थी की मुझे थोड़ा सा समय दें तो अवश्य यहाँ से आज वो प्राप्ति करके जाएँगे। वो ना सिर्फ़ समय देते थे बल्कि बहुत ध्यान से सुनते भी थे और बाद में भी चर्चा कर जीवन में कैसे अपनाए उसके प्रयास में तत्पर रहते थे। बहुत सुंदर प्रतिक्रिया देखने में आती थी।

जब चर्चा में मैं उन्हें गुणों के प्रैक्टिकल फ़ायदो के बारे में तर्कसहित (लाजिक्लीबताती थी तो उन्हें महसूस होता था कि सच में इससे हमारी उन्नति होगीहमारी ख़ुशी बढ़ेगी और हम स्वयं के प्रति भी अच्छी सोच रख पाएँगे और समाज में भी माननीय जीवन जियेंगे।

इस अनुभव के ज़रिए मैं यही कहना चाहती हूँ कि हम ये ना सोचें कि युवा इन बातों की क़दर नहीं करेगा। बिलकुल नहीं। यदि उन्हें सही रीति इस बारे में शिक्षा दी जाए तो भले कौन समाज में ऐसा होगा जो जीवन में उन्नति और संबंधों में मिठास नहीं चाहता होगा।

हम आने वाले कुछ लेखों में भिन्न-भिन्न गुणों के महत्व को समझेंगे और उन्हें जीवन में धारण करने के उपायों पर भी चर्चा करेंगे। हम अपनी ओर से ये छोटा सा प्रयास करेंगे जिससे हम सुंदर समाज और सुंदर देश बना सकें और अपने भारत देश का नाम फिर से विश्व में गौरान्वित कर सकें।