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सोच बदलेगी तो जीवन बदलेगा

एक किसान शहर से दूर अपने गाँव मे रहता थावह सम्पन्न था पर अपने जीवन से खुश नहीं। एक दिन उसने निश्चय किया कि वह अपनी सारी जमीन-जायदाद बेचकर किसी अच्छी जगह बस जाएगा। अगले दिन उसने एक परिचित रियल एस्टेट एजेंट को बुलाया और उससे अपनी प्रॉपर्टी बेचने की इच्छा जाहिर की। एजेंट को अपनी समस्याएँ गिनायीं- ये उबड़-खाबड़ रास्ते देखो, यह झील देखो, जिसके चक्कर में घूम कर रास्ता पार करना पड़ता है। इस छोटे-छोटे पहाड़ों पर जानवरों को चराना मुश्किल है। यह बगीचा देखो। आधा समय इसकी सफाई और रखरखाव में चला जाता है। मुझे बस इसे बेचना है। एजेंट ने इलाके का जायजा लिया और कुछ दिन बाद किसी ग्राहक के साथ आने का वादा किया। दो दिन बाद किसान सुबह का अखबार पढ़ रह था कि शायद किसी अच्छी प्रॉपर्टी का पता चल जाए, जहां वह सब बेचकर जा सके। तभी उसकी नज़र एक विज्ञापन पर पड़ी- “लें सपनों का घर, एक शांत मनोरम जगह, प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर जगह पर बसाएं अपना सुंदर आशियाना”। संपर्क करें- …… ………….

एक किसान शहर से दूर अपने गाँव मे रहता थावह सम्पन्न था पर अपने जीवन से खुश नहीं। एक दिन उसने निश्चय किया कि वह अपनी सारी जमीन-जायदाद बेचकर किसी अच्छी जगह बस जाएगा। अगले दिन उसने एक परिचित रियल एस्टेट एजेंट को बुलाया और उससे अपनी प्रॉपर्टी बेचने की इच्छा जाहिर की। एजेंट को अपनी समस्याएँ गिनायीं- ये उबड़-खाबड़ रास्ते देखो, यह झील देखो, जिसके चक्कर में घूम कर रास्ता पार करना पड़ता है। इस छोटे-छोटे पहाड़ों पर जानवरों को चराना मुश्किल है। यह बगीचा देखो। आधा समय इसकी सफाई और रखरखाव में चला जाता है। मुझे बस इसे बेचना है। एजेंट ने इलाके का जायजा लिया और कुछ दिन बाद किसी ग्राहक के साथ आने का वादा किया। दो दिन बाद किसान सुबह का अखबार पढ़ रह था कि शायद किसी अच्छी प्रॉपर्टी का पता चल जाए, जहां वह सब बेचकर जा सके। तभी उसकी नज़र एक विज्ञापन पर पड़ी- “लें सपनों का घर, एक शांत मनोरम जगह, प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर जगह पर बसाएं अपना सुंदर आशियाना”। संपर्क करें- …… ………….

 


किसान को यह व्योरा पसंद आया पर
, जब उसने प्रॉपर्टी का पता देखा तो चौंक उठा। यह तो उसी की प्रॉपर्टी का विज्ञापन था। तब किसान को यह अहसास हुआ कि वह वाकई अपनी मनचाही जगह पर रहता था। यह उसकी गलती थी कि उसने अपनी चीजों को हमेशा गलत नजरिए से देखा। अब किसान वहीं रहना चाहता था। उसने तुरंत अपने एजेंट से विज्ञापन को अख़बार से हटाने के लिए कहा। 
    उस किसान की तरह हमें भी अपने जीवन से ढेर सारी शिकायतें रहती हैं। व्यक्ति हमेशा किसी न किसी कार्य हेतु संकल्प करते हैं और तब मन में करें
, न करें या क्या करें आदि प्रश्न उठते हैं। मन को सही दिशा-निर्देश मिल जाए, इसके लिए आवश्यक है- सकारात्मक चिंतन”। जीवन में दुख, कष्ट, संघर्ष व विषम परिस्थितियों से हर किसी का सामना होता रहता है। जो इनके आने से निराश हो जाते हैं, आशा का परित्याग कर देते हैं- उनका जीवन बड़ा ही बोझिल, उदास हो जाता है। उन्हें ऐसा लगने लगता है कि वे जीवन में कुछ कर ही नहीं पाएंगे। ऐसे समय में निराशावादी सोच उनके चिंतन पर हावी हो जाती है, आशा की किरण उन्हें दिखाई नहीं पड़ती और वे अपने जीवन को अंधकारमय मानने लगते हैं। ऐसी सोच स्वतः विफलताओं का कारण बनती है। कई बार हम परिस्थितियों को नहीं बदल सकते क्योंकि वे हमारे वश में नहीं होती, हमारे पास केवल मात्र एक ही उपाय बच जाता है- स्वयं का परिवर्तन करना। अपनी सोच को बदलना और उसे  सकारात्मक बनाए रखना। सकारात्मक वृत्ति से अनेक लाभ हैं। यह छोटा सा प्रसंग इसी स्थिति को बताता है।  
       सार यह है कि किसी भी सद्गुण या सकारात्मक वृत्ति या भाव को अपनाने से फायदा होता है। रुकावटें
, परेशानियाँ थोड़ा तनाव अवश्य देती हैं, असफलताएँ निराश करती हैं, लेकिन यदि थोड़ी हिम्मत जुटाई जाए, आशावादी सोच रखी जाए, सकारात्मकता अपनाई जाए और इनसे निपटने के लिए उचित प्रयास किया जाए तो हमें फिर कोई भी निराश नहीं कर सकता।             
परमात्मा ने हमें पर्याप्त गौरव दिया है। जीवन दिया। यह सौभाग्य दिया कि आँखें खोलें और देखें हरे-भरे वृक्षों को
, फूलों को, पंछियों को। कान दिये हैं सुनें प्रकृति के संगीत को। बोध दिया है हमें ताकि हम बुद्ध हो सकें। अब भला क्या चाहने की ज़रूरत है। जरूरत है तो बस परमात्मा का स्मरण करते हुए सद्भाव,सद्विचार और सत्कर्म में निरत रहने की, निमग्न रहने की। जीवन को सही नजरिये से देखने की। अपनी विचारधारा अपने कर्म और व्यवहार सबमें सकारात्मकता लाने कि आवश्यकता है तब ही हम शांति और प्रसन्नता का जीवन जी सकेंगे।  
हिम्मत न हारिए, आशावादी सोच के साथ जुटे रहिए। निराशा स्वयं ही भाग जाएगी, टिक नहीं पाएगी।

 

रश्मि अग्रवाल