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मंदिर का घंटा

"स्टॅटिक डिस्चार्ज यंत्र"

 डॉ राम श्रीवास्तव​

मंदिर में प्रवेश करते समय बड़ा घंटा बंधा होता है। 
प्रवेश करने वाला प्रत्येक भक्त पहले घंटानाद करता है और मंदिर में प्रवेश करता है। क्या वैज्ञानिक कारण है इसके पीछे ? इसका एक वैज्ञानिक कारण है जब हम बृहद घंटा के नीचे खडे रहकर सर ऊंचा करके हाथ उंठाकर घंटा बजाते है तब प्रचंड घंटानाद होता है। यह ध्वनी 330 मिटर प्रती सेकंड इस वेग से अपने उद्गम स्थान से दुर जाती है ध्वनी की यही शक्ती कंपन के माध्यम से प्रवास करती है। आप उस वक्त घंटा के निचे खडे़ होते हैं। अतः ध्वनी का नाद आपके 
सहस्रारचक्र (ब्रम्हरंध्र, सर के ठीक ऊपर) में प्रवेश कर शरीरमार्ग से 
भूमी मे प्रवेश करता है। यह ध्वनि प्रवास करते समय आपके मन में (मस्तक में ) चलने वाले असंख्य विचार, चिंता, टेंशन, उदासी, स्ट्रेस, इन नकारात्मक विचारों को अपने साथ ले जाती हैं और आप निर्विकार अवस्था में परमेश्वर के सामने जाते हैं। 
तब आपके भाव शुद्धता पूर्वक परमेश्वर को समर्पित होते हैं।
व् घंटा के नाद की तरंगों की अत्यंत तीव्र के आघात से आस-पास के वातावरण के व् हमारे शरीर के सूक्ष्म कीटाणुओं का नाश होता है, जिससे वातावरण मे शुद्धता रहती है व् हमें भी स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।

इसीलिए मंदिर मे प्रवेश करते समय घंटानाद जरुर करें और थोडा समय घंटे के नीचे खडे रह कर घंटा नाद का आनंद जरूर लें। आप चिंतामुक्त व शुचिर्भूत बनेगें। मस्तिष्क ईश्वर की दिव्य ऊर्जा ग्रहण करने हेतू तैयार होगा।
ईश्वर की दिव्य ऊर्जा व मंदिर गर्भ की 
दिव्य ऊर्जा शक्ती आपका मस्तिष्क ग्रहण करेगा।
आप प्रसन्न होंगे